मानवाधिकार की वैश्विक घोषणा के संदेश पर खरा उतरने के लिए क्या किया ?

मानवाधिकार दिवस के उपलक्ष पर विज्ञान भवन में आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राष्ट्रपति इस मौके पर एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे मानवाधिकार दिवस हर साल 10 दिसंबर को मनाया जाता है। एनएचआरसी ने कहा कि मानवाधिकार दिवस एक ऐसा दिन है जब दुनियाभर के विभिन्न पक्षकारों को अपनी कार्रवाई व कर्तव्यों का आत्मनिरीक्षण करना होता है और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे किसी के भी मानवाधिकार हनन का कारण मानवाधिकार दिवस के अवसर पर राष्ट्रीयब मानवाधिकार आयोग द्वारा नई दिल्ली में आयोजित किए गए कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी ने कहा कि हमें खुद से सवाल करना चाहिए कि क्या हम एक समाज के तौर पर हंसाबेन मेहता के महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान देने के नज़रिए के साथ जी रहे हैं क्या हममे समानताये है आयोग की मानी जाए तो469 मामलों में मानवाधिकार उल्लंघन के पीड़ितों को राहत के रूप में 15 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस के मौके पर विज्ञान भवन में आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे मानवाधिकार दिवस एक ऐसा दिन है जब पूरे सांसर के सभी पक्षकारों को अपनी कार्रवाई व कर्तव्यों का आत्मनिरीक्षण करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए की वह अन्य किसी के लिए बाधा न उत्पन्न करे । राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के कार्यक्रम में अपने शब्दों में राष्ट्रपति जी ने एक बहुत ही सुंदर बात कहा कि पूरी दुनिया के लिए मानवाधिकार दिवस को मनाने का आदर्श तरीका यह होगा कि हम यह आत्म अवलोकन करें कि हमने मानवाधिकार की वैश्विक घोषणा के संदेश पर खरा उतरने के लिए क्या ! उन तथ्यों की समीक्षा करना, जिसमें आतंकवादी गतिविधियां शामिल हैं जो मानव अधिकारों के उपयोग को रोकती हैं तथा उचित उपचारी उपायों की संस्तुति करना!

रष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग मानव अधिकारों के संरक्षण एवं संवर्ध्दन हेतु भारत की चिंता की एक अभिव्यक्ति माना जाता है इसकी स्थापना अक्टूबर 1993 में की गई थी। जिसमे मानव को उनके अधिकारी होने के लिए जागरूकता दी गई मानव अधिकार सरंक्षण अधिनियम, 1993 में मानव अधिकारों को किस प्रकार निर्धारित किया गया है ?
मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 2 के अनुसार ''मानव अधिकारों'' का अर्थ है संविधान के अंतर्गत गांरटित अथवा अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदाओं में सम्मिलित तथा भारत में न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय जीवन, स्वतंत्रता, समानता तथा व्यक्ति की गरिमा से संबंधित अधिकार। ''अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदाओं'' का अर्थ है 16 दिसम्बर 1966 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अंगीकृत सिविल एवं राजनैतिक अधिकारों संबंधी अंतराष्ट्रीय प्रसंविदा तथा आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों संबंधी अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदा
10 दिसंबर मानवाधिका दिवस के मौके पर आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हमारे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी हैं इसका आयोजन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) कर रहा है। आयोग के मुताबिक, 469 मामलों में मानवाधिकार उल्लंघन के पीड़ितों को राहत के रूप में 15 करोड़ रुपये से अधिक की राशि की दी जाएंगे

आयोग ने मंगलवार को एक पुष्टि की   कि एनएचआरसी ने एक दिसंबर 2020 से इस साल 30 नवंबर तक 1,02,441 मामले दर्ज हुये, जिनमें से 16 मामलो को संज्ञान में लिया गया  उसने बताया कि आयोग ने इस अवधि में 96,804 मामलों का निस्तारण कर दिया
मानवाधिकार दिवस के  उपलक्ष पर विज्ञान भवन में आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि  राष्ट्रपति इस मौके पर एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे मानवाधिकार दिवस हर साल 10 दिसंबर को मनाया जाता है। एनएचआरसी ने कहा कि मानवाधिकार दिवस एक ऐसा दिन है जब दुनियाभर के विभिन्न पक्षकारों को अपनी कार्रवाई व कर्तव्यों का आत्मनिरीक्षण करना होता है और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे किसी के भी मानवाधिकार हनन का कारण  
मानवाधिकार दिवस के अवसर पर राष्ट्रीयब मानवाधिकार आयोग द्वारा नई दिल्ली में आयोजित किए गए कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी ने कहा कि हमें खुद से सवाल करना चाहिए कि क्या हम एक समाज के तौर पर हंसाबेन मेहता के महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान देने के नज़रिए के साथ जी रहे हैं क्या हममे समानताये है
आयोग की मानी जाए तो 469 मामलों में मानवाधिकार उल्लंघन के पीड़ितों को राहत के रूप में 15 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिली बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस के मौके पर विज्ञान भवन में आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे

इस समयःपर एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति  अरुण कुमार मिश्रा और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे !मानवाधिकार दिवस हर साल 10 दिसंबर को मनाया जाता है।
मानवाधिकार दिवस एक ऐसा दिन है जब पूरे सांसर के सभी पक्षकारों को अपनी कार्रवाई व कर्तव्यों का आत्मनिरीक्षण करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए की वह अन्य किसी के लिए बाधा न उत्पन्न  करे ।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के कार्यक्रम में अपने शब्दों में राष्ट्रपति जी  ने एक बहुत ही सुंदर बात कहा कि पूरी दुनिया के लिए मानवाधिकार दिवस को मनाने का आदर्श तरीका यह होगा कि हम यह आत्म अवलोकन करें कि  हमने मानवाधिकार की वैश्विक घोषणा के संदेश पर खरा उतरने के लिए क्या !


अधिनियम के अंतर्गत आयोग को कुछ कार्य सौपे गए हैं आयोग जिसके अनुसार व जिनमे  से कोई भी कार्य करेगा !
खुद ही पहल करके अथवा किसी पीड़ित या उनकी ओर से अन्य व्यक्ति द्वारा दिया गया प्रर्थना पत्र द्वारा  , इन शिकायतों पर जोर देगा!
मानव अधिकारों का हनन अथवा दुरूत्साहित करना अथवा
लोक सेवक द्वारा इस प्रकार के हनन की रोकथाम में लापरवाही

न्यायालय के समक्ष लंबित मानव अधिकारों के हनन के किसी आरोप से संबंधित किसी कार्यवाही में उस न्यायालय की मंजूरी के साथ हस्तक्षेप करना

राज्य सरकार के नियंत्रणाधीन किसी जेल अथवा किसी अन्य संस्थान, जहां लोगों को उपचार, सुधार अथवा संरक्षण के उद्देश्य से कैद अथवा बंद रखा जाता है, का वहां के संवासियों के जीवनयापन की दशाओं का अध्ययन करने तथा उनके संबंध में संस्तुतियाँ करने के लिए राज्य सरकार को सूचित करते हुए, दौरा करना।
मानव अधिकारों के संरक्षण के लिए इसके द्वारा अथवा संविधान के अंतर्गत अथवा कुछ समय के लिए लागू किसी कानून के सुरक्षोपायों की समीक्षा करना

उन तथ्यों की समीक्षा करना, जिसमें आतंकवादी गतिविधियां शामिल हैं जो मानव अधिकारों के उपयोग को रोकती हैं तथा उचित उपचारी उपायों की संस्तुति करना!
मानव अधिकारों से संबंधित संधियां एवं अन्य अंतरराष्ट्रीय दस्तावेजों का अध्ययन करना तथा उनके प्रभावी कार्यान्वयन हेतु संस्तुतियां करना
मानव अधिकारों के क्षेत्र में अनुसंधान कार्य करना तथा उनको बढ़ावा देना
समाज के विभिन्न वर्गों के बीच मानव अधिकार शिक्षा का प्रसार करना तथा प्रकाशनों, मीडिया, सेमिनार तथा अन्य उपलब्ध साधनों से इन अधिकारों के संरक्षण हेतु उपलब्ध सुरक्षोपायों की जागरूकता को बढ़ाना!
गैर सरकारी संगठनों एवं मानव अधिकार के क्षेत्र में कार्यरत संस्थानों के प्रयास को बढ़ावा देना!

मानवाधिकारों की पहली वैश्विक घोषणा और नए संयुक्त राष्ट्र की पहली प्रमुख उपलब्धियों में से एक, मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा की 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के अंगीकरण और उद्घोषणा का सम्मान करने के लिए तिथि का चयन किया गया था। मानवाधिकार दिवस की औपचारिक स्थापना 4 दिसंबर 1950 को महासभा की 317वीं पूर्ण बैठक में हुई, जब महासभा ने संकल्प 423 (V) की घोषणा की, जिसमें सभी सदस्य राज्यों और किसी भी अन्य इच्छुक संगठनों को इस दिन को मनाने के लिए आमंत्रित किया गया था।

इस दिन को आम तौर पर उच्च-स्तरीय राजनीतिक सम्मेलनों और बैठकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मानवाधिकारों के मुद्दों से संबंधित प्रदर्शनियों द्वारा चिह्नित किया जाता है। इसके अलावा, यह परंपरागत रूप से 10 दिसंबर को मानवाधिकारों के क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र पुरस्कार और नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। मानवाधिकार के क्षेत्र में सक्रिय कई सरकारी और गैर-सरकारी संगठन भी इस दिन को मनाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं, जैसा कि कई नागरिक और सामाजिक-कारण संगठन करते हैं।
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