इतालवी फिल्म ओमाइक्रोन

इतालवी फिल्म जो की 1963 में सिनेमा घर में देखी गई किसी को क्या पता की वो एक फिल्म 58 साल बाद लोगो को इतना परेशान कर देगी।अल्फा, बीटा के बाद ओमाइक्रोन वैरिएंट जिस्को डॉक्टर गामा नाम दे रहे हैं ये अब तक के दोनो वेरिएंट से काफ़ी प्रभावली है। वैज्ञानिक-डेटा का आकलन करने के बाद WHO की तरफ से कहा गया है,’शुरुआती साक्ष्यों से पता चलता है कि अन्य वैरिएंट की तुलना में इस वेरिएंट में री-इंफेक्शन का खतरा अधिक हैं।

COVID के नए बढ़ते केसो के तहत मद्देनजर, netizens ने पाया कि 1963 में 'Omicron' नाम की एक मूवी आई  जिसमे COVID के Omicron संस्करण को'चिंता के प्रकार'के रूप में नामित किया गया था। ग्रीक वर्णमाला पत्र के नाम पर रखा गया संस्करण,पहली बार दक्षिण अफ्रीका में शोधकर्ताओं द्वारा निकला गया। कई नेटिज़न्स ने बताया कि संस्करण एक विज्ञान कथा फिल्म से बाहर की तरह लग रहा था और वास्तव में ओमिक्रॉन नाम की एक इतालवी फिल्म है जिसे 1963 में वापस रिलीज़ किया गया था।
कोरोना ने फिर एक नए वायरस के साथ दस्तक दी नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने एक बार फिर पूरी दुनिया की डरा दिया डेल्टा के बाद कोरोना का ये नया वैरिएंट सबसे ज्यादा संक्रामक है। नीदरलैंड,इजरायल,डेनमार्क और ऑस्ट्रेलिया में इसके मामले बहुत तेजी से बढ़ते नज़र आ रहे WHO ने इसे 'वैरिएंट ऑफ कंसर्न'की कैटेगरी में कोरोना के नए वैरिएंट के सामने आने के बाद भारत सरकार भी सतर्क हो रही है। दो साल से कोरोना वायरस से लड़ रही दुनिया किसी तरह उस कहर से निकल ही रही थी कि नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने एक बार फिर से लोगों को दहला दिया दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों ने देश के सबसे अधिक आबादी वाले प्रांत गौटेंग में COVID-19 के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन की पहचान की है। और इसके संभावित खतरों से विश्व स्वास्थ्य संगठन को बताया कोरोना के नए वैरिएंट के सामने आने के बाद भारत सरकार भी सतर्क हो गई हैआइए देखते हैं। कि ओमिक्रॉन वेरिएंट कोरोना के पुराने वैरिएंट से कितना खतारक् हैं और ये कितना नुक्सान पहुचा सकता है।
तेजी से फैलता है ओमिक्रॉन वैरिएंट दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्री जो फाहला के अनुसार,देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले पिछले कुछ दिनों में तेजी से बढ़ते नज़र आ रहे हैं। पिछले कुछ सप्ताह में हर दिन इसके केवल 200 से अधिक नए केश आते थे लेकिन अब यहां एक दिन में 3,200 से अधिक केश सामने आए जिनमें से अधिकांश मामले गौटेंग प्रांत के हैं केसो में अचानक से हुई इस वृद्धि को समझने के लिए, वैज्ञानिकों ने वायरस के सैंपल पर अध्यन किया क्वाज़ुलु-नेटाल रिसर्च इनोवेशन एंड सीक्वेंसिंग प्लेटफॉर्म के निदेशक टुलियो डी ओलिवेरा के अनुसार, गौटेंग में 90% नए केस ओमिक्रॉन वैरिएंट के आये।
वैज्ञानिक-डेटा का आकलन करने के बाद WHO की तरफ से कहा गया है,'शुरुआती साक्ष्यों से पता चलता है कि अन्य वैरिएंट की तुलना में इस वेरिएंट में री-इंफेक्शन का खतरा अधिक हैं इसका मतलब है कि जो लोग COVID-19 की चपेट मे आकर सही हो गए थे ये उन्हे दुबारा से संक्रमित कर सकता हैं।
इसे लेकर दुनियाभर में हाहाकार मचा हुआ है। इसे काफी इंफेक्‍श‍ियस यानी ज्‍यादा रफ्तार से फैलने वाला बताया जा रहा है। कुछ एक्‍सपर्ट्स का यह भी कहनाहै कि इस पर वैक्‍सीन बेअसर है। कोरोना की शुरुआत होने से यह वायरस रूप बदल-बदलकर लोगों की जिंदगियों के लिए खतरा पैदा करता रहा है। इसके पहले दुनिया अल्‍फा,बीटा,गामा,डेल्‍टा की शक्‍ल में इस बहरूपिये वायरस का सामना कर चुकी हैं।
अल्‍फा, बीटा, गामा, डेल्‍टा  का नाम सुनकर कुछ साइंस या गाड़ित याद आ गई पर ऐसा नही ये करोना के नय वेरियन्ट हैं और अब ओमीक्रॉन। ये कोरोना के अलग-अलग वेरिएंट हैं। इन वेरिएंट में  कुछ थोड़ी थोड़ी सी ऐसी चीजें हैं जो इन्‍हें एक जैसा नही रखती और ये स्टेप बाय स्टेप भयानक हो जाता हैं वायरस के म्‍यूटेशन के कारण है ये अलग अलग नजर आये। 
इसके बाद आया बीटा 2020 में आय वेरिएंट को सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में देखा गया बीटा वेरिएंट का वैज्ञानिक नाम B.1.351 है। इसके दो म्यूटेशन E484K और N501Y को सबसे अधिक खतरनाक माना गया है। यह वेरिएंट अपने पुराने प्रकार से 50 फीसदी ज्यादा संक्रामक था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उन लोगों को संक्रमित कर सकता है जो कोरोना वायरस से उबर चुके हैं। इसके अलावा उन लोगों को भी जिन्हें कोविड -19 का टीका लगाया गया है।
इसका तीसरा क्रम आया जोगामा वेरिएंट कहलाया कोरोना वायरस का गामा वेरिएंट सबसे पहले ब्राजील में मिला । गामा वेरिएंट का वैज्ञानिक नाम P.1 है। गामा वेरिएंट के दो स्ट्रेन E484K और N501Y को काफी खतरनाक माना गया है। जांच में पता चला है कि वैक्सीन लगवाने के बाद यह वेरिएंट मामूली रूप से ही असर करता है। फिर डेल्टा ने दस्तक दी कोरोना वायरस का डेल्टा वेरिएंट सबसे पहले भारत में पाया गया था। यह पिछले साल अक्‍टूबर में ट्रेस किया गया। इसे B.1.617.2 के नाम से भी जाना जाता है। इसे दुनियाभर में कोरोना का सबसे अधिक संक्रामक वेरिएंट माना जाता है। हालांकि, इसकी इंसानी जान लेने की क्षमता को लेकर अभी तक कोई दावा नहीं किया गया है। यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, 3 जुलाई को डेल्टा वेरिएंट के अमेरिका में 51.7 फीसदी मामले आए थे। पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड के अनुसार,जून के मध्य तक ब्रिटेन में कुल कोरोना संक्रमण में डेल्टा वेरिएंट की हिस्सेदारी 99 फीसदी थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट है कि 100 देशों में डेल्टा वेरिएंट का पता चला है। इन सब खतरों से अभी दुनिया निकल ही नही पाई कि ओमीक्रॉन वेरिएंट आ गया 26 नवंबर को विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) ने इस वेरिएंट को ओमीक्रॉन नाम दिया है। इसका साइंटिफिक नेम B.1.1.529 है। इसके बारे में अभी अधिक से अधिक जनकारी जुटाई जा रही हैं। हालांकि, कोरोना के इस वेरिएंट को बहुत ज्‍यादा इंफेक्शियस बताया जा रहा है। इस वेरिएंट की पहचान दक्षिण अफ्रीका में हुई। यह स्‍ट्रेन बोत्सवाना सहित आसपास के देशों में फैल गया है। इसने पूरी तरह से वैक्‍सीनेटेड लोगों को भी संक्रमित किया है। एम्‍स दिल्‍ली में कोविड टास्‍क फोर्स के चेयरपर्सन डॉक्‍टर नवीत विग के अनुसार,नया वेरिएंट ज्‍यादा ट्रांसमिसबल है। यानी यह अधिक तेजी से फैलता है। यह इम्‍यूनिटी से लड़ने में कुशल है और यह बहुत अधिक शक्ति को भी कम कर देता हैं।
बढ़ती बीमारी को देखते हुए झारखंड के चिकित्सकों ने दक्षिण अफ्रीका में मिले कोविड-19 के नए वैंरिएंट omicron पर प्रदेश के लोगों के लिए सलाह दीकी है रिम्स के कोरोना टास्क फोर्स के कोऑर्डिनेटर डॉ.प्रभात कुमार ने ओमीक्रॉन पर कहा कि दक्षिण अफ्रीका में मिले कोरोना के नए वैरिएंट ओमीक्रॉन से घबराएं नहीं कोरोना प्रोटोकॉल नियम करें डॉ.प्रभात कुमार ने कहा कि omicron india में क्या प्रभाव डालेगा,इसका पता चलने में अभी समय लगेगा दुनिया भर में कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन के खतरे के मद्देनजर भारत में विदेश से आने वाले यात्रियों के लिए गाइडलाइन जारी की इधर omicron virus को लेकर झारखंड और राजधानी रांची के डॉक्टर्स ने भी ओमीक्रॉन को लेकर अलर्ट रहने की हिदायत दी है। इससे भयभीत न होने की भी सलाह दी है डॉक्टर्स ने पहले से तय कोरोना प्रोटोकॉल का गंभीरता से पालन करने और वैक्सीनेशन कराने की भी लोगों को सलाह दी। 
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